सोमवार, 26 अगस्त 2024

ट्रेफिक

खुश था बहुत की आज
सरपट दौड़ेगी मेरी गाड़ी।

घर से निकलते ही
ट्रेफिक जाम था भारी।

कहीं सिग्नल से, कहीं गड्ढों से,
रुकी हुई थी गाड़ी।

पग-पग के सफर मे आज,
हुई अंग्रेज़ी, हिन्दी पर भारी।

गूगल का रंग भी गहरा हो चला,
हरे की तलाश थी जारी।

परशासन की नाकामी थी,
जनता की परेशानी।

किलोमीटर की किमत सबपर,
घंटों मे थी आई।

- सुमन्त शेखर 

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