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मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

काठमांडू यात्रा

इन्तेजार के ये पल,
कुछ बीत गए, कुछ बीतेंगे।
मंजिल हमको रोक रही,
पर मंजिल तक हम पहुचेंगे।

है रात हो चली, शाम ढल गयी,
मेरी भी है वाट लग गयी।
नींद ने मुझसे ठानी है,
रात भर की जगवारी है।

मैं यहां जगु, सब वहां जगे,
इन्तेजार में रात ये काली है।
पहले पत्नी थी इसमे उलझी,
अब आयी मेरी बारी है।

काठमांडू की पहली यात्रा,
अबतक सबसे भारी है।
पशुपतिनाथ के दर्शन की इच्छा,
अब भी मेरे मन मे बाकी है।
--सुमन्त शेखर।

बुधवार, 15 मई 2019

विमान यात्रा

मेरे शहर में रात होने को था,
अंधकार भी पैर पसारने को था,
इंडिगो विमान ने तब ही गति को पकड़ा था
फलक से ऊपर उड़ान भरना शुरू किया था,

क्षितिज को निहारने में आनंद आने लगा था,
विमान के एक ओर विकराल अंधकार था,
तो दूसरी ओर सूरज का प्रकाश था,
काले बादलों के ऊपर सूरज विद्यमान था।

ऊपर से नीला पिला नारंगी लाल था,
नीचे काले बदलो का फैला साम्राज्य था,
भीतर विमान के एल-इ-डी का प्रकाश था,
दूसरी तरफ अब घना अंधकार था।

परिचारिकाओं का चाय पानी भी व्यापार था,
शुरू में ही बताया ये उनका ही विचार था,
हमने भी ऊपर डैशबोर्ड का बटन दबाया था,
कुछ ग्लास पानी का बारबार मंगवाया था।

धीरे धीरे अंधकार हो रहा व्याप्त था,
अब क्षितिज पर हो रहा रात था,
मेरी आंखों पर नींद सवार था,
मुझे आया सोने का विचार था।
--सुमन्त शेखर

गुरुवार, 30 मार्च 2017

विमान यात्रा

इंडिगो विमान में सांध्यकालीन यात्रा के दौरान महसूस किये गए कुछ पलों को आपसे साझा करना  चाहूंगा।

उड़ते हुए विमान से,
जब नीचे देखा रात में,
लगा दहकते अंगार बिछे हैं,
बिजली से रोशन घरबार से।
ऊपर चाँद,
नीचे अंगार,
मध्य में दोनों के,
इंडिगो विमान,
भीतर प्रकाशमान,
बहार घना अंधकार,
अँधेरे में लगते जुगनु,
प्रकाश से रोशन अकेले घर,
नीचे सड़कें है मानो,
कोई जलता हुआ शाख,
कहीं जलते हुए कोयले,
पर बुझी हुई राख,
कहीं एकदम लाल,
कहीं उजली सी दरार,
अन्य जगहों पर है,
कला अँधेरा बरक़रार,
तेज हवा के झोकों की,
आ रही ये आवाज,
परिचारिकायें कर रही,
चाय, पानी का व्यापार,
कोई तो पूछ ले,
इनकी मुस्कराहट का राज,
विमान के डैनों पर,
वो भुकभुकाता बल्ब,
लगता जैसे बता रहा है,
घबराओ मत, मैं हु इधर,
ठीक सर के ऊपर,
लगा है एसी का बटन,
घुमा के सेट करो
हवा ज्यादा चाहिए या कम,
बगल में लगा है एक स्पीकर,
जिसपर कैप्टेन करे है वेलकम,
और परिचारिकायें बताएं,
कौन है आज का विमान दल,
कुर्सी की पेटी बांध ले,
विमान उड़ने को तैयार है,
विमान में कितने है द्वार,
क्या आपातकालीन विचार है,
फिर से एक आवाज आई है,
विमान गंतव्य पर उतरने को तैयार है,
कर्मी दल को यह उम्मीद है,
कि उन्होंने यात्रा सुखद कराई है।
धन्यवाद....
©सुमन्त शेखर।