बादल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बादल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 25 सितंबर 2019

बरसात

इन्द्रधनुष हुआ आच्छादित,
मेघों ने उसका संधान किया,
तड़ित वाणों से आपस मे मिलकर,
जोरो से गर्जन नाद किया,
आघातों को सह कर के फिर,
मेघों ने है बरसात किया।

काले काले बादल थे वो,
अहंकार में था नाद किया,
आपस मे लड़कर फिर मेघों में,
जल बूंदों में विस्तार किया,
नन्ही नन्ही बूंदों ने फिर,
वर्षा कर धरा का मार्ग लिया।
--सुमन्त शेखर

शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

ऐ बरसते बादलो

ऐ बरसते बादलो,
यू ना बरसो सब जगह,
बरसना ही है तो बरसो वहाँ,
इक बूंद को तरसते लोग जहा,

माना कि तूने भर दिए है,
हर गड्ढ़े हर नाली,
पर नहीं मिला है जीवों को,
पिने का साफ पानी,

मत बरस तू इतना ज्यादा,
मेरे शहर में,
नहीं यहाँ मिट्टी की जमीन,
अब कंक्रीट खाली,

ना जायेगा पानी जमीन के भीतर,
बह जायेगा संग नाली,
सड़को पर भरेगा पानी,
सबको होगी बहुत परेशानी,

ऐ बरसते बादलो,
यू ना बरसो सब जगह,
बरसना ही है तो बरसो वहाँ,
इक बूंद को तरसते लोग जहा।

--सुमन्त शेखर।

सोमवार, 25 अप्रैल 2016

बारिश के बादल

बादल छाये थे बड़े घनेरे,
अब बारिश होने को थी,
मन का मयुर उतावला हो चला था,
शायद आज तन गिला होना था,
तभी बादलों का गड़ गड़ाना हुआ,
पानी की छोटी छोटी बुँदे,
आसमान से धरती की तरफ,
तीव्र वेग से आती हुई,
जब धरा से टकराई,
एक पफ की आवाज आई,
मिट्टी की एक सोंधी सी खुशबु,
मेरे मन को भाई,
फिर एकाएक ठंडी हवाए आई,
डर लगा जैसे ये बारिश न भगाए,
कुछ बूँद ही सही,
मेरे घर के छत पे आये,
फिर कुछ थमी हवाए,
गीली हुई थी अब ये फ़िज़ाएं,
ठंडक का एहसास मिला है,
बाहर सब साफ सुथरा है,
अब बस ऐसे ही बारिश हो,
जरुरत भर जितनी हो,
कुछ फूल कलियाँ अब खिल जाएँगी,
मुरझाये पोधे जागेंगे,
बस बादल तू ऐसे ही आना,
हर गली खेत को सदा भिगाना,
रहे न सुखा जग में कही,
बादल तू अच्छे से आना।
--सुमन्त शेखर।

सोमवार, 21 सितंबर 2015

बादलों को भी शरमाना आ गया

मद्धम मद्धम सी रौशनी अब चाँद की
शर्म से लाल होने लगी है
बादलों का झुरमुट भी अब देखो उससे
जाने क्यों दूर जाने लगा है।

लालिमा को ढकने वाला बादल आज
चाँद को कश्मकश में क्यों छोड़ गया
शायद लाल होते हुए चाँद के दीदार से
आज बादलो को भी शरमाना आ गया।

-- सुमन्त शेखर