गर्मी में पानी,
जब लाई है आंधी,
तब्दील हो गयी
नदी में नाली।
लगे समंदर
सा हर मंजर,
गली गली,
या शहर शहर।
मौसम ने बदला,
आज जो करवट,
गाड़ी में बैठ के,
बन जा केवट।
--सुमन्त शेखर।
मेरे ख्यालों के कुछ रंग मेरे भावो की अभिव्यक्ति है। जीवन में घटित होने वाली घटनायें कभी कभी प्रेरणा स्रोत का काम कर जाती है । यही प्रेरणा शब्दों के माध्यम से प्रस्फुटित होती है जिसे मैंने कविता के रूप सजाने का प्रयास किया है । आनंद लिजिये।
गर्मी में पानी,
जब लाई है आंधी,
तब्दील हो गयी
नदी में नाली।
लगे समंदर
सा हर मंजर,
गली गली,
या शहर शहर।
मौसम ने बदला,
आज जो करवट,
गाड़ी में बैठ के,
बन जा केवट।
--सुमन्त शेखर।
प्रचंड प्रबल वेग से,
पवन गतिमान है,
मेघाभिमान नभ में,
तड़ित प्रकाशमान है,
जलकणों में टूट से,
शीत का संचार है,
नवबिन्दु के प्रभाव से,
अंकुर में भी जान है।
लो हुई मेघों में मार है,
तड़ित की झंकार है,
जलबिंदु की बौछार है,
नभ का धरा पर वार है,
रात्रि का उसे साथ है,
सर्वत्र अंधकार है।
--सुमन्त शेखर।