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बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

नींद

सोने लगा हूँ 
आजकल मै किश्तो में,
रात में घर पर,
आफिस आते जाते कैब में।

कौन कहता है कि 
काफी पीने से नींद नहीं आती,
मेरे लिए तो ये है
बेहिसाब सोने की गारंटी। ☕

बैठा हूं काफी पीने के बाद,
की शायद अब नींद आएगी,
इक हवा का झोंका आया,
और उसने नींद ही भुला दी।

कैसे सोऊ मै,
अब यही कशमकश है,
सिर कहता सो जा,
हो रहा मुझे कष्ट है।

अलग अलग तरीके मै अब सोच रहा,
कैसे आएगी नींद अब तू ही बता,
थकान सी लग रही मै चला सोने,
गर नींद आ जाए तो मुझे ना जगा।
सुमन्त शेखर 

मंगलवार, 14 अगस्त 2018

करार

मेरी नींद उड़ गई,
रातों का करार खो गया,
जब मुझे बदहजमी हुई,
और पेट खराब हो गया।
--सुमन्त

सोमवार, 22 मई 2017

नींद

रातभर मैं करवटें बदलता रहा,
रातभर मैं किश्तों में सोता रहा,
नींद तो आंखों को आती थी,
पर रह रह कर कही चली जाती,
रात भर मौसम को कोसते रहे,
रह रह कर पानी भी पीते रहे,
और ये कमबख्त नींद भी मुझे,
ना जाने कौन कौन से ख्वाब दिखाती रही,
कभी सपने में मुझे हँसाती, कभी रुलाती,
बार बार मुझे भगाती रहती,
मैं फिर उठता, पानी पीता और,
अगले सपने में भागने को तैयार रहता।
--सुमन्त शेखर

गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

शायद मुझे नींद आ रही थी

दोपहर के बाद का समय था 
खा कर लौटे कुछ देर हो चला था 
आँखे भारी सी लग रही थी 
मन को आलस घेर रहा था 
देह कुछ करने को तैयार ना था 
बार बार जम्हाई आ रही थी 
कभी गर्दन को दाये झटकता 
तो कभी बाये झटकता 
कभी खुद को चिकोटी काटता 
कभी अंगुलिया चटकाता 
कभी पानी की दो घुंट पीकर 
दो चार कदम यूं ही चलता
कंप्यूटर पर कुछ लिख रहा था मै 
अंगुलिया स्वतः रुक सी गयी थी 
जाने क्या हो रहा था मुझे 
शायद मुझे नींद आ रही थी |