बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

नींद

सोने लगा हूँ 
आजकल मै किश्तो में,
रात में घर पर,
आफिस आते जाते कैब में।

कौन कहता है कि 
काफी पीने से नींद नहीं आती,
मेरे लिए तो ये है
बेहिसाब सोने की गारंटी। ☕

बैठा हूं काफी पीने के बाद,
की शायद अब नींद आएगी,
इक हवा का झोंका आया,
और उसने नींद ही भुला दी।

कैसे सोऊ मै,
अब यही कशमकश है,
सिर कहता सो जा,
हो रहा मुझे कष्ट है।

अलग अलग तरीके मै अब सोच रहा,
कैसे आएगी नींद अब तू ही बता,
थकान सी लग रही मै चला सोने,
गर नींद आ जाए तो मुझे ना जगा।
सुमन्त शेखर 

शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

सर्दी जुकाम

डॉक्टर - ए - डॉक्टर 
है मुझको सर्दी-जुकाम 
देखो हालत मेरी
हूँ कितना परेशान 

है नाक ये बहता
गला है खस्ता
सर में हल्का दर्द भी होता
कुछ ना मुझको करने देता

आयुर्वेदिक एलोपैथिक 
युनानी या जड़ी बूटी,
कुछ भी देदो जल्दी से
है हालात मेरी टूटी फूटी,

कुछ ऐसा तुम उपचार करो
दर्द का कम तमाम करो,
जादू की छड़ी घुमाओ ऐसा
हो जाऊं मै पहले जैसा।
सुमन्त शेखर

सोमवार, 26 अगस्त 2024

ट्रेफिक

खुश था बहुत की आज
सरपट दौड़ेगी मेरी गाड़ी।

घर से निकलते ही
ट्रेफिक जाम था भारी।

कहीं सिग्नल से, कहीं गड्ढों से,
रुकी हुई थी गाड़ी।

पग-पग के सफर मे आज,
हुई अंग्रेज़ी, हिन्दी पर भारी।

गूगल का रंग भी गहरा हो चला,
हरे की तलाश थी जारी।

परशासन की नाकामी थी,
जनता की परेशानी।

किलोमीटर की किमत सबपर,
घंटों मे थी आई।

- सुमन्त शेखर 

मंगलवार, 1 अगस्त 2023

कौन हूँ मैं?

तलाश है मुझे खुद की,
खुद से ये पूछता हूँ मैं,
कौन हूँ मैं?
ढूंढता अपने आस्तित्व को,
आईने से पूछता,
कौन हूँ मैं?
आंखों में स्वप्न लिए,
भटकता मैं दर दर,
कौन हूँ मैं?
हर मोड़ पर ख्वाहिशें है मिटती,
दिल के समंदर में लहरे है उठती,
कौन हूँ मैं?
गौण हूँ मैं,
तसल्ली का तलबगार,
गुमनाम हूँ मैं।
--सुमन्त शेखर।

सोमवार, 3 जनवरी 2022

नया सफर

वक्त का कारवां बढ़ चला,
मुसाफिरों को मंजिल पर ले जाने को,
मैं भी था मंजिल का मुसाफिर,
सवार हो गया मैं मंजिल पर जाने को।

नम थी पलकें ना जाने क्यों,
कुछ साथी थे शायद छूट जाने को,
मिला वो अपनापन प्यार मुझे,
सिखाता रहा जो नया आजमाने को।

वो कहते क्यूं घबराते हो नई चीजों से,
पीछे खड़ा हूँ मैं सदा गलतियां सुधारने को,
तुम इक कोशिश तो करो,
जिंदगी तैयार है तुम्हे सब सिखाने को।

भले ही आपस मे मिले ना हो कई,
सब जिद्दी है समस्याओं को सुलझाने को,
सब एक से बढकर एक धुरंदर,
जीते हैं हमेशा जीत के आने को।

साथ हमारा बस यहीं तक,
अब नया मोड़ है आने को,
संभव है आगे चल कर के फिर,
कोई मोड़ बनी हो मिल जाने को।

चल पड़ा हूँ मैं भी यारो,
नए दोस्त बनाने को,
नया सफर है नई डगर है,
तैयार कलम है नई कहानी लिखने को।
--सुमन्त शेखर

शनिवार, 26 दिसंबर 2020

हुनरबाज

हुनरबाजों का हमने हुनर है देखा,
भवंर से किश्ती को निकलते देखा,
खोई उम्मीद को जागते देखा,
अमावस में चांद निकलते देखा।

हाथों में करीने की सफाई देखी,
टूटे मशीनों की जुड़ाई देखी,
संभावनाओं की अनंत जहां देखी,
हौसलों की मुकम्मल उड़ान देखी।

--सुमन्त शेखर।

शनिवार, 28 नवंबर 2020

।।निज व्यथा कथा।।

उलझा हुआ हूँ खुद में आज मै,
कैसे बाहर आऊं,
जीवन की यह अबूझ पहेली,
कैसे मै सुलझाऊँ।
डेडलाइन की विकट समस्या,
स्प्रिंट में बतलाऊँ,
माइल स्टोन के चक्कर मे,
मैं खुद ही फंस जाऊं।
अरे छुट्टी फुट्टी भूल जा भईया,
अब काहे आफिस जाऊं,
अब घर से ही है काम जे करना,
छुट्टी ना ले पाऊँ।
अब आया है समय रे भईया,
काम जो कुछ कर जाऊं,
घर परिवार मित्र और खुद को,
थोड़ा समय दे पाऊँ।
-सुमन्त शेखर