इक वर्ष के समापन का
धन्यवाद इसके हर देन का
करो अभिनन्दन नववर्ष का
फैले प्रकाश हर्षोल्लास का
मंगलमय पावन हो वर्ष
बीते सबका जीवन सहर्ष
चित्त रहे सदा प्रसन्न
प्रभु करें दया अन्नन्त।
--सुमन्त शेखर
मेरे ख्यालों के कुछ रंग मेरे भावो की अभिव्यक्ति है। जीवन में घटित होने वाली घटनायें कभी कभी प्रेरणा स्रोत का काम कर जाती है । यही प्रेरणा शब्दों के माध्यम से प्रस्फुटित होती है जिसे मैंने कविता के रूप सजाने का प्रयास किया है । आनंद लिजिये।
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गुरुवार, 31 दिसंबर 2015
नव वर्ष की बधाई
सोमवार, 29 दिसंबर 2014
वर्ष 2015
हो रहा ये वर्ष समापन
आगाज नए का करना है
कर लो अब तैयारी पुरी
नाच गाना थोड़ी मस्ती
झुमेगी हर झुग्गी बस्ती
शहरो में भी रहेगी मस्ती
करेंगे खुब हल्ला गुल्ला
स्वागत वर्ष दो हजार पंद्रह
शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014
नववर्ष
अब कुछ घड़ियाँ और बची है
नए साल के आने में
याद करो सब क्या खोया -पाया
बीत गए ज़माने में
कुछ अच्छा पाया
कुछ हमने किया ख़राब
सोचो क्या करना है अब
भुल जाओ कल का हिसाब
फैला दो नयनो की चादर
करो स्वागत सहर्ष उल्लास
मधुर रहे ये पावन नववर्ष
समृद्ध करे यह जीवन हरपल
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