मेरे ख्यालों के कुछ रंग मेरे भावो की अभिव्यक्ति है। जीवन में घटित होने वाली घटनायें कभी कभी प्रेरणा स्रोत का काम कर जाती है । यही प्रेरणा शब्दों के माध्यम से प्रस्फुटित होती है जिसे मैंने कविता के रूप सजाने का प्रयास किया है । आनंद लिजिये।
तरकश में तीर अभी और भी हैं, कितने जख्म खाओगे तुम, कुछ कतरे खून के बचा लो अभी, लौट के घर को जाओगे तुम। --सुमन्त शेखर।