बुधवार, 4 मार्च 2015

होली आई

झिमी झिमी बारिश में 
तन ये मेरा भीगा है 
होली के इन्तेजार में देखो 
रंग अभी तक सुखा है 

रविवार, 8 फ़रवरी 2015

मेरी दिनचर्या

सुबह ​होती 
​आँखे मिचे
तज बिस्तर कोजल्दी ​मैं भागूं 
आठ से पांच ​है ​समय ऑफिस का 
घडी का कांटा आठ बताता 
अक्सर यूं ही देर देर मै करता 
सारी गलती बस पे मढ़ता 
दस बजे को ऑफिस आता 
पहले तो है मीटिंग होता 
फिर चाय कॉफ़ी का दौर है चलता 
आकर के फिर रिपोर्ट बनाना 
थोड़ा बहुत कोडिंग भी करना 
सबके साथ फिर लंच में जाना 
वापस आके फिर कोडिंग करना 
फिर नींद आने पर चाय है पीना 
संग थोड़ा सा गप्पें करना 
पांच बजे को ऑफिस छोड़ना
सात बजे तक घर को आना
फिर थोड़ा सा दौड़ लगाना
घर में आकर खाना खाना
फिर फेसबुक पर चैटिंग करना
देर रात में फिर सो जाना
यही रहती दिनचर्या मेरी
हर दिन ये ना एक सा रहता
थोड़ा सा परिवर्तन रहता
करता हुँ प्रयास यही
सुबह जागूँ मैं थोड़ा जल्दी
बस करता हुँ प्रयास यही

सोमवार, 2 फ़रवरी 2015

इंटरनेट का अभाव

आज खुद को बेबस महसूस करता हूँ मैं 
जब भी इंटरनेट से जुदा हो जाता हूँ मैं 
कहाँ ईमेल और फेसबुक पर रहता था व्यस्त 
आज अचानक से हो गया हूँ त्रस्त 

बेकार सा पड़ा हुआ हूँ मै आज घर में 
जी नहीं लगता मेरा आज किसी काम में 
कोसता हूँ जी भर बीएसएनएल को आज मैं 
क्यों करते है देर लोग सरकारी काम में 

घर में है टीवी इंटरनेट से चलने वाला 
इंटरनेट के अभाव में बन गया ये केबल वाला 
बारबार देखता हूँ मैं लैपटॉप 
शायद चलने लगा हो इंटरनेट मेरा 

शुक्रवार, 30 जनवरी 2015

हिन्दी भाषा

मन में मेरे उठा ये सवाल है 
हिन्दी भाषा का क्या आधार है
क्यों हो रहा शब्दों का विस्मरण
कैसे करूं मै इसका मनन

लिखने को हिन्दी में जब मै 
कर कलम ले कागज में लिखता 
हिन्दी के शब्दों को छोड़ो 
ए बी सी डी ही छप जाता

भुल ना जाऊं मै अब हिन्दी 
मुझको इसका डर है सताता 
करता हुँ धन्यवाद गूगल का 
जिसने हिन्दी का शब्द बचाया

मंगलवार, 13 जनवरी 2015

शेर vs शेर

उस शेर और इस शेर में बस इतना सा ही है फर्क
एक जंगलों में मिलता है और एक रहता हमारे संग
वो करता सबको खौफजदा ये लोगो को है बहुत पसंद 
दुर भागते है सब उससे, ये दिल में जगह बनाता है
आप एक शेर से डरते हो, मैं शेरो के संग रहता हुँ 

बुधवार, 7 जनवरी 2015

सवाल ?

तलाश रहा हुँ मैं खुद को 
जाने क्या मेरी पहचान है
कौन हुँ मैं क्या ध्येय है मेरा 
सबसे बड़ा सवाल है ?
जीवन के अंधेर डगर पर 
किस मंजिल तक मुझे जाना है 
क्या खोना है,क्या पाना है 
कब तक धक्के खाना है ?
उलझी है ये डोर जगत की 
कैसे इसे सुलझाना है 
सोच रहा हुँ मै मुसाफिर 
कितनी दुर अभी जाना है ?

शुक्रवार, 2 जनवरी 2015

खाने का स्वाद

बाजार से लौटते वक्त 
लोगो ने पुछ दिया मुझसे आज 
सुमन्त शेखर !!!
क्या लाये हो आज 
क्या खाने में है कुछ खास 
जवाब में यही मै कह पाया 
लाया हूँ खाने का स्वाद 
नमक मिर्च संग थोरा प्याज 
मीठे का भी कुछ है भाग 
चलो मिलकर भोग लगाये आज।