बुधवार, 20 जनवरी 2016

केजरी और मोदी की लड़ाई

गुस्ताखी माफ़
प्रस्तुत है
केजरी और मोदी की लड़ाई
इसे कल्पना ही समझना मेरे भाई!

केजरीवाल सोने गया,
मच्छरदानी लगाना भूल गया,
मच्छर ने काट लिया
तब केजरीवाल ने बयान दिया
"जी हमारी कोई गलती नहीं है,
ये सब मोदी जी का किया धरा है,
ना उन्होंने मुझे टेंशन दिया होता,
ना मैं मच्छरदानी लगाना भूलता।"

फिर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में,
सिसोदिया बैठे बीच में
आषुतोश उनके दाये
बिस्वास बैठे बाये,
मीडिया को सब समझाए
विपछ हमको कितना सताए
सुरक्षा हमको केंद्र से दिलवाओ
केजरीवाल की जान बचाओ।

मोदी ने केजरी को समझाया
मच्छर भगाओ अभियान था
जब भी हमने चलाया
आप ने कर्मचारियों को घर से भगाया
अब जब मच्छर को मौका मिला
तो उसने है केजरी पर दंश आजमाया
अब क्यों डरते हो आप
हम सब खड़े है आपके साथ।

गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

नव वर्ष की बधाई

इक वर्ष के समापन का
धन्यवाद इसके हर देन का
करो अभिनन्दन नववर्ष का
फैले प्रकाश हर्षोल्लास का
मंगलमय पावन हो वर्ष
बीते सबका जीवन सहर्ष
चित्त रहे सदा प्रसन्न
प्रभु करें दया अन्नन्त।
--सुमन्त शेखर

रविवार, 22 नवंबर 2015

क्या होगा अब पढ़ने से।

आज के दौर में पढ़ना लिखना बेइमानी है
ज्यादा पढ़लिख के लोग यहाँ करते सबकी गुलामी है
कम पढ़ेलिखे को मिलती यहाँ देखो राजशाही है
परिणाम स्वरुप मेरे मन में नयी दुविधा उग आई है
क्यों पढ़े लिखे हम
नहीं करना हमको को गुलामी है
यार खेलो कूदो फिर
लेना सब से सलामी है
नवीं फेल यहाँ मंत्री है
डिग्री वाला बना संतरी है
कतराता है अब बच्चा बच्चा
कहता क्या होगा अब पढ़ने से|

सोमवार, 9 नवंबर 2015

घर

सब को घर जाते देख
मेरे मन भी उठा उद्वेग
मन जाना चाह रहा था घर
पिताश्री का आया आदेश
रुक जाओ उधर
मत आओ इधर
हम स्वयं मिलने को आएंगे
सब लोगो को लाएंगे
वहा ज्यादा है जरुरत तुम्हारा
करो कर्तव्य का वहन तुम सारा
नियत समय पर तुम्हे आना होगा
तबतक कर्म निभाना होगा
-- सुमन्त शेखर

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2015

पलकें

पलकें जो खुली हो
आँखे दीदार ऐ दुनिया करती है
हर शख्स के चेहरे से
उसका हाल ऐ दर्द पढ़ती है
पलकें जो खुली हो
महबुब की आँखों में झांकती है
उसकी आँखों में मोहब्बत से भरी
अपनी तस्वीर निहारती है
पलकें जो खुली हो
आँखें दुनिया के हर रंग से खेलती है
कही फैला हुआ गम
तो कही बटती खुशिया देखती है
पलकें जो खुली हो
हर फुल कली बड़ी प्यारी लगती है
सभी के होठो पे फैली मुस्कान
देखने वाली होती है
पलकें जो बंद हो
इंसान को खुद का एहसास कराती है
हर धड़कन और हर साँस की
एक एक स्पन्दन सुनाती है
पलकें बंद हो तो
इंसान को खुद से पहचान कराती है
अपने भीतर छुपे हुए तूफान से
खुद को परिचय करवाती है
पलकें बंद हो तो
सच और झूठ का वास्तविक रूप दिखाती है
हर इंसान के सोचने और समझने की
नयी ऊर्जा दिलाती है।

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2015

लाल बहादुर शास्त्री

लाल तो बहुत से बहादुर हुए
पर कोई दूसरा लालबहादुर ना हुआ
लाहौर पर फतेह कर ले
कोई ऐसा दूसरा प्रधानमंत्री ना हुआ।
जय जवान जय किसान का नारा
जब भारत की गलियों में गुंजा था
हरित क्रांति ला जिसने भारत को
खाद्यान में आत्मनिर्भर बनाया था
हर देशवासी को नाज है जिसपर
वो लाल बहादुर शास्त्री है
स्वावलंबी था जीवन में अपने
भारत को वो वीर सपुत।
#lalbahdurshastri

मंगलवार, 22 सितंबर 2015

बस यही सौगात मांगता हुँ

यूँ तो आज हमने उम्र के एक पड़ाव को पार किया 
लोग कहते है बुढ़ापे की तरफ एक और कदम बढ़ा दिया 
गौर से देखो तो नजर कुछ और आता है 
कि इस दुनिया में संघर्ष का और एक साल निकाल लिया 

ये तो बस आप सभी के आशीर्वाद और दुआओं का फल है 
जो हमने ये मुकाम पा लिया 
बरसता रहे आपका आशीर्वाद और दुआ हम पर अनवरत 
बस यही सौगात मांगता हुँ 
--सुमन्त शेखर