मंगलवार, 9 सितंबर 2014

दर दर भटक रहा हूँ

दर दर भटक रहा हूँ 
कुछ पाने की आस में 
प्यास लगी है जोरो की 
कुआँ है पास में 
बंधी है बाल्टी 
रस्सी के छोरो में 
घुमती है चकरी 
बाल्टी के डोरो में 
कोशिस की हमने भी 
अपनी तकनीको से 
की आ जाये पानी 
डोरे की बाल्टी से 
छलकती है बाल्टी 
पानी को छुने में 
भरती है पानी 
बाल्टी के पेंदे में 
खींचता हु डोरा 
अपने बाजु के जोरो से 
बाहर आता है पानी 
बाल्टी के भरने से |

शनिवार, 23 अगस्त 2014

परिवर्तन

इन्तेजार में बीत गई सर्द राते 
अब सुबह होने को है 
जीवन के इस डगर में 
परिवर्तन होने को है 

शुक्रवार, 22 अगस्त 2014

वो शाम

बड़ी नागवार गुजरी थी वो शाम 
जब किताबो के सारे हर्फ़ स्याह हो गए
कोशिश बहुत की हमने शब्दों को समेटने की
पर सारे हल्फ हवा हो गए |

शुक्रवार, 15 अगस्त 2014

शत शत नमन शहीदो तुमको

करता हूँ शत शत नमन देश के उन शहीदो को
जो मर मिटे देश के खातिर सहा दंष अंग्रेजो का 
हुई लाल ये धरती सारी 
जिनके अन्नंत बलिदानो से 
शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद
खुदीराम बोस, सुखदेव और राजगुरु
इनसब को देश तुम रखना याद 
लाला ,गांधी और सरदार भी थे
जिनके साथ था हिंदुस्तान 
स्वतंत्रता संग्राम में खड़ा एक साथ
सन सैतालिस में दिन वो आया 
अगस्त पंद्रह को तिरंगा लहराया 
लालकिले से नेहरू ने 
सबका फिर आभार जताया 
देश की सेवा में भी कितने 
हुए शहीद है तब से अबतक
हे हिंदुस्तान के प्रहरी जवानो  
श्रद्धा सुमन है अर्पित सब को 
शत शत नमन शहीदो तुमको|

गुरुवार, 24 जुलाई 2014

हार का विश्लेषण

खेलने क्रिकेट हम चले 
करके सब तैयारी रे 
हार गए हम पहले मैच में 
कब आएगी बारी रे 

हार का लिया पूरा संज्ञान 
हुआ विश्लेषण भारी रे 
गेंद फेंकने की जुगत में 
आंत मुह को आई रे 

बल्ले को जब हमने थामा 
गेंद विकेट पर जाये रे 
चौके छक्के मार ना पाये 
हुआ जीतना मुश्किल रे 

जिसने था अभ्यास किया 
जीत उसी ने पाई रे 
अब हमने है ठान लिया 
अबकी जीत हमारी रे |

शनिवार, 19 जुलाई 2014

गर्लफ्रेंड का तोहफा

मेरे दोस्त की बर्थडे पार्टी में 
उसकी गर्लफ्रेंड ने किया बवाल था  
केक पर दोस्त का नाम था  
साथ में दूसरी लड़की का नाम था 

लड़की के तेवर फिर गर्म हुए 
मेरे दोस्त का तेवर नरम हुआ 
लड़की को फिर जो गुस्सा आया 
फटे हाल हुआ दोस्त बेचारा 

लात घूसा चप्पल थप्पड़ की 
अब हुई यहाँ जो बारिश थी 
लगा भीगने दोस्त हमारा 
बहुत मस्त था सीन ये सारा 

बुधवार, 2 जुलाई 2014

सगाई का लड्डु

मेरे दोस्त की अभी अभी हुई है सगाई 
खुश है की अब जल्दी से मिलेगी लुगाई 
ना जाने कैसा इश्क हुआ है उनको भाई 
अब फ़ोन पर चिपके रहते है ओढ़ के रजाई 

होठ हिलते है केवल , कुछ आवाज नहीं होती  
एक दूसरे से ऐसे ही रात भर उनकी बात होती 
जान जानु सोनु बाबु बड़े प्यार से कह के बुलाते 
मीठे मीठे सपने में खोये यूं ही अक्सर रात बिताते