मेरे ख्यालों के कुछ रंग मेरे भावो की अभिव्यक्ति है। जीवन में घटित होने वाली घटनायें कभी कभी प्रेरणा स्रोत का काम कर जाती है । यही प्रेरणा शब्दों के माध्यम से प्रस्फुटित होती है जिसे मैंने कविता के रूप सजाने का प्रयास किया है । आनंद लिजिये।
सोमवार, 6 जुलाई 2020
नेता
सोमवार, 30 मार्च 2020
डेवेलपर गाथा
मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020
काठमांडू यात्रा
सोमवार, 27 जनवरी 2020
मेंरे देश की मिट्टी
गुरुवार, 5 दिसंबर 2019
मम्मी बोली
बुधवार, 25 सितंबर 2019
बरसात
इन्द्रधनुष हुआ आच्छादित,
मेघों ने उसका संधान किया,
तड़ित वाणों से आपस मे मिलकर,
जोरो से गर्जन नाद किया,
आघातों को सह कर के फिर,
मेघों ने है बरसात किया।
काले काले बादल थे वो,
अहंकार में था नाद किया,
आपस मे लड़कर फिर मेघों में,
जल बूंदों में विस्तार किया,
नन्ही नन्ही बूंदों ने फिर,
वर्षा कर धरा का मार्ग लिया।
--सुमन्त शेखर
शनिवार, 7 सितंबर 2019
चंद्रयान
बेवकूफ हैं वो लोग,
जो कहते हैं कि,
चंद्रयान सफल नही हुआ,
विक्रम चांद पर उतर ना सका,
अरे ये विक्रम था,
जिसे देख कर चांद भी डर गया,
और उसे आगोश में छुपा लिया,
चांद को भी डर था विक्रम से,
आज रोवर के आया है,
कल इंसान ले आएगा,
फिर चांद पर रहने वाला इंसान,
करवाचौथ कैसे मनाएगा,
यहीं पर गलती कर गया है चांद,
इसरो को चुनौती दे बैठा है चांद,
सोचता है विक्रम को रोक दिया,
तो रुक जाएगा हिंदुस्तान,
लेकिन ऑर्बिटर के पाश में,
अभी बंधा हुआ है चांद,
अभी भी मौका है,
सुधर जा ऐ चांद,
विक्रम को इसरो से,
जुड़ जाने दे चांद।
-- सुमन्त शेखर