मंगलवार, 22 सितंबर 2015

बस यही सौगात मांगता हुँ

यूँ तो आज हमने उम्र के एक पड़ाव को पार किया 
लोग कहते है बुढ़ापे की तरफ एक और कदम बढ़ा दिया 
गौर से देखो तो नजर कुछ और आता है 
कि इस दुनिया में संघर्ष का और एक साल निकाल लिया 

ये तो बस आप सभी के आशीर्वाद और दुआओं का फल है 
जो हमने ये मुकाम पा लिया 
बरसता रहे आपका आशीर्वाद और दुआ हम पर अनवरत 
बस यही सौगात मांगता हुँ 
--सुमन्त शेखर 

सोमवार, 21 सितंबर 2015

बादलों को भी शरमाना आ गया

मद्धम मद्धम सी रौशनी अब चाँद की
शर्म से लाल होने लगी है
बादलों का झुरमुट भी अब देखो उससे
जाने क्यों दूर जाने लगा है।

लालिमा को ढकने वाला बादल आज
चाँद को कश्मकश में क्यों छोड़ गया
शायद लाल होते हुए चाँद के दीदार से
आज बादलो को भी शरमाना आ गया।

-- सुमन्त शेखर

मंगलवार, 18 अगस्त 2015

सुखद संसार

देख रहा हुँ मैं बादलों का चमकना
दुर कही हो रहा है उनका बरसना
रात के इस अँधेरे में काले अंधेरे में
बादलों के मशालों का जलना
पलक झपकते ही फिर कहीं खो जाना
अंधेरे में युं ही चमकते रहना
हमको यह बतलाता है
स्थाई नहीं है कुछ भी यहाँ
फिर तु क्यों सभी से लड़ता है
अपने अहंकार की खातिर
क्यों मित्रों को खोता है
चलो छोड़े हम अपना स्वार्थ
मिलकर बनाएं हम सुखद संसार।

पौधे।

आज फिर कुछ पोधे लगाए है हमने
सींचा भी है जड़ो को उनकी
कुछ वर्षो में पोधे से पेड़ बनेंगे
उनमे फिर जब फल आएंगे
शाखें निचे झुक जाएँगी
पर स्थिरता इनकी कम न होगी
आता है जब आंधी तुफान
करते सब उनका सम्मान
जो रहता खड़ा अहंकार में अपने
मूल समेत उखड़ जाता वो जड़ से
सिख बहुत कुछ मिलती है इनसे
रहो स्थिर सदा सुख दुःख में
परोपकार का भाव हो मन में
सबको एक बराबर समझो
अहंकार के न साथ खड़े हो
सेवा करना परम धेय्य हो
पग जमीन पर सदा टीके हों।

सोमवार, 29 जून 2015

मौसम बरसात का

ये मौसम बरसात का 
गुजर जाये तो अच्छा है 
ये आलम बेबसी का 
बस! कट जाये तो अच्छा है 

बरसता है बादल अब कुछ ऐसे 
मानो कबकी प्यासी जमीन हो जैसे 
कहीं पानी को तरसती है जिंदगी
कहीं पानी से जूझती है जिंदगी 

बस अब ये बरसात ठहर जाये तो अच्छा 
हर प्यासे को पानी मिल जाये तो अच्छा 
कही बाढ़ ना आये तो अच्छा 
जरुरत भर बरस जाये तो अच्छा 

ये मौसम बरसात का 
गुजर जाये तो अच्छा है 
ये आलम बेबसी का 
बस! कट जाये तो अच्छा है |

शनिवार, 30 मई 2015

अभी देर है

लोग कहते है जोड़िया स्वर्ग में बना करती है 
और धरती पर हकीकत में तब्दील हुआ करती है 
मै भी खुद के लिए जोड़ी तलाश कर रहा हुँ अब 
पर पता चला है स्वर्ग में अभी हड़ताल मचा है 
पहले से शादी करने को कुछ अप्सराओ में तकरार बढ़ा है 
मेनका और रम्भा में अभी ये मामला अटका पड़ा है 
जाँच में मालूम हुआ है मेरा नंबर पहला है। 

शुक्रवार, 15 मई 2015

मेरा पड़ोसी

मेरा एक पड़ोसी ऐसा था 
मानो वह मुझसे जलता था 
औरो की तारीफें करता 
मुझको निचा खुब दिखाता 
फलना के लड़के को देखो 
है पढ़ता रहता दिनभर वो 
चिलना के बच्चे को देखो 
किया टॉप है उसने देखो 
अपने बच्चे की ना कहता 
पोल खुलेगी उससे देखो 
मै क्या हुँ करता कहा को जाता 
आँख उसी पे वो रखे रहता 
मुझको अक्सर वो ताने देता 
मै भी उससे खार था खाता 

पर इसका था एक और भी पहलु 
था मेरा पडोसी मेरा शुभचिंतक 
उसने भी मुझको राह दिखाया 
था उत्प्रेरक का किरदार निभाया 
चुनौतियों से परिचय करवाया 
पड़ोसी का उसने धर्म निभाया 
जो मुझको उसने था दर्पण दिखलाया 
करता हूँ अभिवादन मै उनका।