रविवार, 14 दिसंबर 2014

आज और कल

कि जीता है हर इंसान आज में 
फिर भी सोच रहा है कल की
कितना भी कच्चा हो ​जग में
पर बिसात बिछाता है वो पक्की 

जुझता है आज से
चाहें कितना भी हो मुश्किल
चाह यही है दिल में
कि हर ख़्वाब हो जाये मुमकिन

लिए ख़्वाब इन आँखों में
हमने भी यही चाहा है
कितनी भी मुश्किल हो आज
कल का दिन हमारा है

यूँ तो कल नहीं आता है
इक मंजिल सा दे जाता है
मंजिल को पाने की जिद में
हर इंसान आज को जीता है

शनिवार, 13 दिसंबर 2014

जन्मदिन

जन्मदिन मुबारक हो तुमको तुम्हारा 
पार कर ली है तुमने एक वर्ष की ये संघर्ष यात्रा 
है दुआए हम ये देते तुमको आज फिर 
लोग जाने अब तुमसे परिवार को हमेशा 

नहीं होती है राह कभी आसान जिंदगी की 
करो तुम पार हर चुनौती तक़दीर की 
ना मानो हार कभी किसी काम को करने से 
क्योंकि यही तो है कुंजी कल को जीने की 

बुधवार, 10 दिसंबर 2014

क्रिसमस और नया साल

​​वही जमीन है 
वही आसमान है 
मेरे चारो ओर सबकुछ वही है 
फिर भी कुछ बदल सा गया है

चारो तरफ लोगो को देखो 
किसी उधेड़बुन में रहने लगे है 
कोई सांता बनता कोई तारे बनाता 
जैसे क्रिसमस का तयोहार हो आता 

अरे ये महीना कौन सा है
लो ये तो दिसंबर आ गया है 
तभी तो कहु ठण्ड क्यों लग रही है 
क्रिसमस और नया साल आ गया है 

रविवार, 7 दिसंबर 2014

फिर सुबह होगी

रात होती है कि अब फिर सुबह होगी 
हर रात की किस्मत यही मुकम्मल होगी​​

ये जो बीत गया दिन बेहद हसीन था 
आनेवाला दिन भी लाजवाब होगा 

बस इस रात को गुजर जाने दो
कि सुबह फिर तुम्हे गले लगा सके 

शुक्रवार, 5 दिसंबर 2014

पड़ाव ये आखिरी

दर्दे जुदाई तो अब सहना पड़ेगा 
हमे भी इस बदलाव से गुजरना पड़ेगा 
जिंदगी के सफर में मुकाम हजारो है 
हमें हर मुकाम को पार करना पड़ेगा 

माना की इस कहानी का पड़ाव ये आखिरी
पर जान लो ये सफर की छोटी सी इक कड़ी  
अभी और भी है कड़िया कई जोड़नी 
हर जोड़ पर इसके हमे मिलती नई कहानी 

जिंदगी के सफर में मिलते है मुसाफिर अनेक 
सब देते जाते हमको अपने अनुभव बुरे भले 
हु मै शुक्रगुजार उनसब मुसाफिरों का 
जिन्होंने मुझे सिखाया फलसफा ये जिंदगी का 

मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

होगी शादी आपकी भी एकदिन

सुर्ख़ लाल जोड़े में वो आएगी 
आपको गले से लगाएगी 
आपकी किस्मत का सितारा बदलेगा उस दिन 
जब वो आपके घर आएगी 

अब तक जो आप छुट्टा सांड थे 
वो आपको बकरा बनाएगी
होशियार रहना ए मेरे दोस्त 
जिंदगी तो बस एक मौका ही दे पायेगी 

चढ़ो जो घोड़ी पर 
समझ लेना उस दिन 
जिंदगी ने दिया है ये मौका आपको उस दिन 
भगा लो घोड़ी को जो ना बनना हो बकरा 

मगर किस्मत को कौन बदल सका है मेरे दोस्त 
ना भगा पाओगे आप घोड़ी को उसरोज 
बंधोगे आप मंडप में उसके जोड़े से एक दिन 
होगी शादी आपकी भी एकदिन। 

सोमवार, 1 दिसंबर 2014

मनःस्थिति

मैं मेनका
चली रिझाने 
महर्षि 
विश्वामित्र को। 

कभी मृदंग की ढाप से, 
कभी केशों की छाव से,
अपने सोलह श्रृंगार से,
नृत्य की झंकार से,

कभी वीणा के वान से,
कभी सितार के तार से, 
अपने कदमो के थापों से, 
नव यौवन की अदाओ से, 

हर सम्भव प्रयास करू मैं
नित नव अनुसन्धान करू मैं 
मान जाओ हे विश्वामित्र ,
अब तुझको प्रणाम करू मैं।