रविवार, 9 मार्च 2014

खेलो होली सब हर साल

रंगों का त्योहार है आया 
खेलो जम के होली रे 
छुटेगी फुहार सभी की 
हसी खुशी ठिठोली रे 

होलीका का हवन जलाकर 
पिचकारी से धार चला कर 
भांग का प्रसाद खिला कर 
खेले होली सब मिलजुल कर 

रंगबिरंगे सब के चेहरे 
अबीर गुलाल है सब ने खेले 
कुछ है सुखे कुछ के गीले 
रंजो गम आपस के भुले 

अलग अलग पकवान बने है 
सबसे मिलने लोग चले है 
होली का ये मिलन अनूठा 
बैर भाव भुल, प्यार से मीठा 

रंग होली के जीवन में भर लो 
हर भाव समाहित खुद में कर लो 
स्नेह समर्पण का ये त्योहार 
खेलो होली सब हर साल 

गुरुवार, 6 मार्च 2014

अम्बर बारिश करवाता है

ग्रीष्म में तपी धरती 
जब उगलती आग 
झड़ जाते है पत्ते सारे 
सुनी रहती डाल 

स्वेद से तन गीला होता 
और शुष्क होते प्राण 
सब अम्बर से है आस लगाते 
अब जल्दी से बरसात करा दे 

लो अब अम्बर गहराता है 
घनघोर घटाये लाता है 
नभ से फिर बरसाता है 
जीवन की प्यास बुझाता है 

नव जीवन तब इठलाती है 
धरती दुल्हन सी सज जाती है 
खग मोर पपीहा गाते है 
जीवन का राग सुनाते है 

बारिश की छोटी बूंदो से 
जब धरा का संगम होता है 
नव जीवन का अंकुर जगत में 
अंगड़ाई ले जग जाता है 

गर्मी की अलसाई रातो में
अब नया सबेरा होता है 
नव जीवन के रंगो से अब
अम्बर बारिश करवाता है 
--सुमन्त शेखर

सोमवार, 3 मार्च 2014

लौहनगरी टाटानगर

देश की पहली 
लौहनगरी 
मना रही है 
आज जयंती 

टाटा का ये शहर पुराना 
सज के बना बड़ा सुहाना 
दो नदियों का है यहाँ संगम
डिमना भी है बहुत मनोरम 

कारखानो से पटा नगर ये 
जुबली का है पार्क यहाँ 
साक्ची का है ग्राम निराला 
प्रायोजित है शहर घर सारा 

टाटा ने था सपना ये देखा 
इस्पात से है देश जोड़ना 
सपना ये साकार हुआ है 
सारी दुनिया में मान हुआ है 

टाटा ऐन संस का 
दुनिया में कारोबार हुआ है 
टाटा का ये सपना 
सच में आज साकार हुआ है 

जमशेद जी का जमशेदपुर
टाटा जी का ये टाटानगर 
आज भी सबको प्यारा है 
झारखण्ड का ये महानगर 

शनिवार, 1 मार्च 2014

एक एहसास

होश तो जाने किस जहान में रहता है 
ना दर्द का एहसास होता है 
ना खुशियों का भान 
ऐसे मोजों में अक्सर खो जाता इंसान 

इक ख़ुशी भी है इक गम भी पास 
जाने कैसा था वो एहसास
इक बार मिला फिर छूट गया 
हर गम के बादल चीर गया
नया सबेरा दिखा गया 
अदभुत था मेरा वो एहसास । 

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

बसंत मनाये दुनिया सारी

बड़ी खामोश रहती थी राते 
ठंडी ने थी पाव पसारे 
सब आलस में चादर ताने 

हवाए पूरी शांत थी 
पूस वाली वात थी 

फिर मौसम में परिवर्तन आया 
हवाओं ने भी वेग अपनाया 
ऋतुराज ने कदम बढ़ाया 
पेड़ो ने नव पल्लव पाया 
अमिया ने भी खुब लुभाया 
नव फुलो से बाग भरा है 
खग कलरव का सारा समा है 

ठंडी गरमी एक सामान 
धूल का नहीं है नाम-निशान 

माँ शारदा को किया नमन  
शिव को भी फिर किया प्रसन्न 
अब आएगी होली की बारी 
रंग भर सब खेलें पिचकारी 
बसंत मनाये दुनिया सारी। 

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

महाशिवरात्री

महाशिवरात्री 
वर्ष में एक बार है आती 
करो जो उपवास आज 
बेलपत्र जल अर्पण के साथ 
बरसेगी कृपा सभी पर साथ 
करते रहो बस शिव का ध्यान 
महादेव करें कल्याण 
कही भोलेनाथ कहलाते है 
कभी महाकाल बन जाते 
पशुपतिनाथ सोमनाथ है 
अमरनाथ है बैजनाथ है 
जगतगुरु विश्वनाथ है 
शीश पर चंद्र है जटा में गंगा का वास 
बोलो हर हर शिव शम्भु नाथ 
पंचाछरी जो शिव को लुभाय 
ॐ नमः शिवाय 
ॐ नमः शिवाय

बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

मंजिल का पता

हर ख्वाब के हर हर्फ़ अपने होंगे 
हर दिन और हर रात अपने होंगे 
मुसाफिर हैं हम हर पड़ाव अपने होंगे 
जमीन अपना हर आसमान अपना होगा 

जरूरत है तो बस नींद से जागने की 
फिर आसमान को झुकाने की 
मंजिल की ओर कदम बढ़ाने की 
हर मुश्किल से दो हाथ करने की 

ना कभी रुकने ना थकने की 
हमेशा डटे रहने की 
कभी ना हार मानने की 
फिर हर मुश्किल आसान होगी 

हर मंजिल सजदा करेगी 
अपना रास्ता खुद बयां करेगी